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लम्बी हवाई यात्रा तीन -तीन मूवीज़ देखने के बाद अब क्या करें? कॉफ़ी बनायी और थोड़ी वॉक कर ली। जहाज़ की परिचरिकाओं से भी बात करली.... सीट पे आकर बैठे, लगा चलो हिंदी गानों की विडीओ देखते हैं। खोलते ही ए आर रहमान का गीत आ गया दिल से रे........एक सूरज निकला था, कुछ पारा पिघला था। एक आँधी आयी…

होना तो चाहिए था -"तुम जब होगे साठ साल के और मैं होंगी पचपन की बोलो प्रीत निभा............. इस बार जब मैं घर आया माँ-पापा से बात करते-करते कहीं कुछ वातावरण में बदलाव सा लगा। There was something a miss. बहुत सोचा क्या बात हो सकती है? Mummy अनमनी सी और पापा भूले-भूले से। हम सभी भाई बहन अपनी-अपनी ज़िंदगी…

"आपको जिस हाल जीना है ,जीना ही पड़ेगा, मौत माँगे से भी नहीं मिलती है । मुझे पूरा भरोसा है ज़िंदगी ऐसीच है मैडम, मैंने बीस सालों में कई जिंदगियों को जिया है । हम सपने की तरह जी रहे थे .....जो आप खुली आँखों देखते हैं .....बहुत ख़ौफ़नाक!" ये शब्द थे बस्तर के भीषण जंगलों से बाहर आयी एक…

रेल की पटरी.......मैं सरपट दौड़ती चली जा रही हूँ पीछे-पीछे पापा, "बेटे मुझे पूरा याद कर के सुना दे।" "फिर ..... पापा, फिर तो नहीं पूछोगे?" "ना...". "Arise, Awake and sleep no more..... बस .......". मेरे हाथों में अमलतास की फूलों भारी टहनी और उनके हाथों में गुल मोहर की हम ये फूल अम्माँ को गिफ़्ट करते थे...... वो मुझे…

यूँ ही मेज़ पर रखी मासिक पत्रिकाओं के पन्ने टटोलते हुए निगाह कुछ अभिव्यक्तियों पर पड़ी। मैंने उन्हें डायरी में अंकित कर लिया। दिल तक छू जानेवाली ये कविताएँ और उनमें भी कुछ पंक्तियाँ ऐसी, जो ज़ुबान पर बार -बार आएँ। कम शब्दों में अनुकरणीय और सटीक पेशकश...... मित्रों, ऐसी गागर में सागर जैसी बातों को क्यों ना गहराई से…

रॉयल एन्फ़ील्ड की धमक सुन मैं उछलकर फ़ुटपाथ पर चढ़ गयी। कनखियों से देखा तो studs का भारी हेलमेट उतरा और चमकीले काले बाल उसके कंधों पर बिखर गए, अद्भुत फ़िल्मी सीन था। तीखे नैन नक्शोंवाली नवयुवती कंधे पर पीछे बैग उछालकर सामने की बिल्डिंग में गुम हो गयी, और मैं उसकी मोबाइक ही देखकर भावुक हो उठी। अपनी पुरानी…

इस वर्ष अगस्त में मुझे देहरादून के शांत सुरम्य वातावरण में स्थित ऐन मैरी स्कूल ने आमंत्रित किया। देहरादून मेरा घर है। मैं बहुत प्रसन्न हुआ। जिस दिन मेरी workshop शुरू हुई, उस दिन वहाँ तक़रीबन १२० अध्यापिकाएं थीं। उनके चेहरे पर मधुर स्मित मुस्कान दिख रही थी। भ्रमित भाव-भंगिमाएँ और फुसफुसाहटें तैर रही थीं। ऐसा मुझे बहुत बार देखने…

2015 के सितंबर के पहले हफ्ते में ऐसा लगने लगा था कि मानों मुझे कहीं भी छुट्टी पर जाना है, बस यहां इस भीड़-भाड़ में नहीं रहना। इस बात का अंदाज़ा कतई नहीं था कि आगे एक ट्रैक मेरा इंतज़ार कर रहा था। लैपटॉप पर जब 'कहां जा सकते हैं'? इस सवाल का जवाब ढूंढना शुरू किया तो ट्रैक पर…

रेखाओं की तरह खिंची चमकती ऑंखें, चेहरे पर गहरी लकीरें, व्हील चेयर पर बैठे इस शख़्स में कुछ एेसा था जिसने हमारा ध्यान खींचा। हमने उनके पीछे खड़े साथी से बातचीत शुरु की। उन्होंने बताया जीवन में घटनाएँ अचानक ही घटती हैं, सिर्फ़ हमें उनके साथ समझौता करना आना चाहिए। हमने उनसे पूछा,"आपने अपने जीवन में आनेवाले परिवर्तन से क्या…

१७ नवम्बर २०१५ की गहराती शाम, मैं अपनी बहन और माँ के साथ देहरादून में घर के टेरेस पर खड़ा यूँ ही हँसी मज़ाक़ कर रहा था। तभी मेरी बहन और मैंने निर्णय लिया कि चलो बाज़ार से केक ले आते हैं और माँ सड़क के पार पुजारी जी से मिलकर कल की पूजा के लिए समय ले लेंगी।१८ नवम्बर…

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