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Category Archives छलकन

होना तो चाहिए था -"तुम जब होगे साठ साल के और मैं होंगी पचपन की बोलो प्रीत निभा............. इस बार जब मैं घर आया माँ-पापा से बात करते-करते कहीं कुछ वातावरण में बदलाव सा लगा। There was something a miss. बहुत सोचा क्या बात हो सकती है? Mummy अनमनी सी और पापा भूले-भूले से। हम सभी भाई बहन अपनी-अपनी ज़िंदगी…

"आपको जिस हाल जीना है ,जीना ही पड़ेगा, मौत माँगे से भी नहीं मिलती है । मुझे पूरा भरोसा है ज़िंदगी ऐसीच है मैडम, मैंने बीस सालों में कई जिंदगियों को जिया है । हम सपने की तरह जी रहे थे .....जो आप खुली आँखों देखते हैं .....बहुत ख़ौफ़नाक!" ये शब्द थे बस्तर के भीषण जंगलों से बाहर आयी एक…

रेल की पटरी.......मैं सरपट दौड़ती चली जा रही हूँ पीछे-पीछे पापा, "बेटे मुझे पूरा याद कर के सुना दे।" "फिर ..... पापा, फिर तो नहीं पूछोगे?" "ना...". "Arise, Awake and sleep no more..... बस .......". मेरे हाथों में अमलतास की फूलों भारी टहनी और उनके हाथों में गुल मोहर की हम ये फूल अम्माँ को गिफ़्ट करते थे...... वो मुझे…

यूँ ही मेज़ पर रखी मासिक पत्रिकाओं के पन्ने टटोलते हुए निगाह कुछ अभिव्यक्तियों पर पड़ी। मैंने उन्हें डायरी में अंकित कर लिया। दिल तक छू जानेवाली ये कविताएँ और उनमें भी कुछ पंक्तियाँ ऐसी, जो ज़ुबान पर बार -बार आएँ। कम शब्दों में अनुकरणीय और सटीक पेशकश...... मित्रों, ऐसी गागर में सागर जैसी बातों को क्यों ना गहराई से…

इस वर्ष अगस्त में मुझे देहरादून के शांत सुरम्य वातावरण में स्थित ऐन मैरी स्कूल ने आमंत्रित किया। देहरादून मेरा घर है। मैं बहुत प्रसन्न हुआ। जिस दिन मेरी workshop शुरू हुई, उस दिन वहाँ तक़रीबन १२० अध्यापिकाएं थीं। उनके चेहरे पर मधुर स्मित मुस्कान दिख रही थी। भ्रमित भाव-भंगिमाएँ और फुसफुसाहटें तैर रही थीं। ऐसा मुझे बहुत बार देखने…

रेखाओं की तरह खिंची चमकती ऑंखें, चेहरे पर गहरी लकीरें, व्हील चेयर पर बैठे इस शख़्स में कुछ एेसा था जिसने हमारा ध्यान खींचा। हमने उनके पीछे खड़े साथी से बातचीत शुरु की। उन्होंने बताया जीवन में घटनाएँ अचानक ही घटती हैं, सिर्फ़ हमें उनके साथ समझौता करना आना चाहिए। हमने उनसे पूछा,"आपने अपने जीवन में आनेवाले परिवर्तन से क्या…

१७ नवम्बर २०१५ की गहराती शाम, मैं अपनी बहन और माँ के साथ देहरादून में घर के टेरेस पर खड़ा यूँ ही हँसी मज़ाक़ कर रहा था। तभी मेरी बहन और मैंने निर्णय लिया कि चलो बाज़ार से केक ले आते हैं और माँ सड़क के पार पुजारी जी से मिलकर कल की पूजा के लिए समय ले लेंगी।१८ नवम्बर…

मेरे अपने काम के कैलेंडर से माथा पच्ची करने के बाद मुझे लगा कि औसतन एक महीने में मैं, डेढ़ से दो हज़ार लोगों से मिल रहा हूँ। एक शिक्षक, गीत लेखक, स्क्रिप्ट प्ले लेखक, कार्यकारी प्रोड्यूसर और कवि के रोल में मुझे लगता है कि मैं सबसे पहले Hello कहने वाला और तुरंत ही अलविदा कहने वाला व्यवसायी हूँ।…

"आपके जीवन का सार क्या है? इससे आपने क्या ग्रहण किया? बीबी बताइए ना! अपने जीवन से मिली शिक्षा।" सौ वर्षीया बीबी मुस्कुराते हुए सोचने लगीं। हाथ में हिंदी का अख़बार और बेंत की कुर्सी पर सन जैसे सफ़ेद बालों वाली बीबी सहज ही बोलीं, "जिज्ञासा, जिज्ञासु रहो। बहुत सीखोगे।" सन १९१४ में जन्म लेने वाली बीबी ने जीवन भर…

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