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Category Archives कारवां

"मेरे पापा को लाऽओ। मेरे पापा को ल्लाओऽऽ?" ममता दिव्यांग है। देखने में सात आठ वर्ष की लगती है पर है पन्द्रह वर्ष की। कुछ दिन पहले ही उसके पापा का स्वर्गवास एक्सीडेंट से हो गया था। जब पापा थे तब समय से ममता को स्कूल से लाने, ले जाने की जिम्मेवारी बहुत लगन से निभाते थे। धूप, सर्दी, पानी,…

जब से विद्यालय में मैंने पढ़ाना शुरू किया तब से ही रंगमंच मेरे साथ जैसे जुड़ गया था। बच्चों के साथ जब उन्हें कुछ सिखाने का प्रयास करती तो स्वयं ही कुछ सीख जाती। रंगमंच कितना प्रभावशाली माध्यम है अभिव्यक्ति का! मैंने इसके द्वारा कितने बच्चों के व्यक्तित्व को बदलते हुए देखा है। जो बच्चे पहले संकोची से होते हैं,…

बचपन से ही हमें बड़े-बड़े लक्ष्य भेदने की प्रेरणा दी जाती है और यह नहीं समझाया जाता कि ज़िंदगी तो छोटी-छोटी उपलब्धियों से बनती है। छोटे-छोटे लक्ष्य,छोटी-छोटी उपलब्धियाँ बच्चे को जीवनपथ का अारोही बना देती हैं। > आपके पास बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपए ना भी हों पर यदि इस ब्लॉग को पढ़ पा रहे हैं तो आप धनी और…

चारों तरफ़ बच्चों की किलकारियाँ,आवाज़ें गूँज रही हैं। कुछ बच्चे आपस में किसी बात पर खिल-खिलाकर हँस रहे हैं, कुछ सहमे से एक बेंच पर बैठे चारों तरफ़ खाली-खाली निगाहों से देख रहे हैं। हमारे चाइल्ड हेल्प केअर सेंटर में बहुत सी जगह मेक्शिफ़्ट टेंट्स के ज़रिए सिर्फ़ बच्चों के खेलने और अन्य कार्यों के लिए बना दी गयी है।…

2015 के सितंबर के पहले हफ्ते में ऐसा लगने लगा था कि मानों मुझे कहीं भी छुट्टी पर जाना है, बस यहां इस भीड़-भाड़ में नहीं रहना। इस बात का अंदाज़ा कतई नहीं था कि आगे एक ट्रैक मेरा इंतज़ार कर रहा था। लैपटॉप पर जब 'कहां जा सकते हैं'? इस सवाल का जवाब ढूंढना शुरू किया तो ट्रैक पर…

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